आयुर्वेद और स्वास्थ

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आयुर्वेद और स्वास्थ
आयुर्वेद और स्वास्थ

आयुर्वेद और स्वास्थ: आयुर्वेद में निरोगी जीवन को धर्म माना गया है | इस बात से आप समझ सकते है की निरोगी जीवन कितना महत्वपूर्ण है | बीमार होकर लम्बी उम्र प्राप्त करना, या निरोगी होकर कम उम्र प्राप्त करना दोनों ही आयुर्वेद में मान्य नहीं है |

अब मन में ये सवाल उठेगा की फिर कैसे स्वस्थ होकर लम्बी उम्र प्राप्त की जाए |
स्वास्थ्य प्राकृतिक रूप में बना रहे इसके लिए जो सबसे उपयोगी ज्ञान है वो हमें आयुर्वेद में मिलता है |
आयुर्वेद का पालन करने से आप बीमार ही नहीं पड़ेंगे, ऐसा संयमित जीवन आपको आयुर्वेद ही दे सकता है |बाकि सभी चिकित्सा पद्धति आपको बीमारी का इलाज देती है, स्वास्थ्य आपको सिर्फ आयुर्वेद ही दे सकता है |आयुर्वेद हमारी भारतीय संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है |

वात, पित, और कफ

वात, पित, और कफ ये तीन हमारे शरीर में मौजूद होते है, जिनका की संतुलन बिगड़ने से आप बीमार हो जाते है | ये तीनो ही शरीर के सभी हिस्सों में मौजूद रहते है |
विशेष रूप से वात नाभि के नीचे, पित नाभि और ह्रदय के बीच में, और कफ ह्रदय से ऊपर वाले भाग में रहता है |
बुढ़ापे में वायु का, जवानी में पित्त का, बचपन में कफ का असर रहता है |
बचपन में स्निग्ध, शीत जैसे गुण की वजह से कफ अधिक बनता है |
इसी प्रकार से युवा अवस्था में धातुओं और रक्त का अधिक निर्माण होता है |

रक्त निर्माण में पित्त की भूमिका होती है, और शारीरिक श्रम अधिक होने के कारण, भोजन भी अधिक आवश्यक होता है, जिससे पित्त की अधिकता रहती है |
युवा अवस्था में पित्त का बनना जरुरी है, रक्त और धातुओं का निर्माण इस पर ही निर्भर है |
पित्त के गुण है तीक्षण और उष्ण |बुढ़ापे में शरीर पर वायु का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसका की गुण रुक्ष और गति है |

सुबह कफ, दोपहर में पित, और रात में वायु का असर रहता है | भोजन करते समय कफ की मात्रा शरीर में अधिक होती है | खाना पचने के समय पित की प्रधानता रहती है | पाचन के बाद वायु की प्रधानता रहती है |

पानी को ज़हर न बनने दे

कुछ बातें जो हम सब जानते है, मगर मानते नहीं उसमे सबसे महत्वपूर्ण बात है, भोजन से जुड़ी हुई |

आपने सुना होगा की भोजन के पहले या बाद में पानी नहीं पिए |
इस बात के पीछे जो कारण है, वो यह है की पेट में खाना पचने के लिए पकता है |
इस प्रक्रिया में जठराग्नि का निर्माण होता है, जो की पेट में प्राकृतिक रूप से बनने वाली आग है, जिससे खाना पचता है |
पानी पाचन क्रिया के लिए जलती हुई अग्नि को शांत कर देता है |
खाना कम या ज्यादा खाने से ज्यादा जरूरी है उसका पचना, नहीं तो खाना सड़ जाता है पेट में, और विष बन जाता है |
जिससे की यूरिक एसिड, LDL (Low Density lipoprotive) मतलब कोलेस्ट्रॉल, VLDL(Very Low Density lipoprotive) जो की ज़हर है स्वास्थ के लिए, ऐसे ही 103 प्रकार के विष है जो बन सकते है |
हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर की समस्या जैसी न जाने कितनी बीमारी इस कारण ही जन्म लेती है |

सबसे बड़ी समस्या

1 घंटे 48 मिनट की अवधि (खाने के बाद) पानी पीना स्वास्थ की दृष्टि से सही है, इतने समय में खाना पेस्ट जैसा बन जाता है, जो की पाचन क्रिया का पहला चरण है |
पानी शरीर के सभी अंगो में जाता है, अगर बच जाए तो मूत्र पिंड तक पहुंच जाता है, इसमें लगने वाला समय 45 मिनट है |
अब अगर आप इस अवधि में पानी पिएंगे, तो पाचन क्रिया बाधित होगी |
ये कितनी बीमारियों को जन्म देगी ये आप जान गए है, पानी को विष बनने से बचाये, और स्वस्थ होकर जीवन जिए

योग के 5 स्तम्भ

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3 COMMENTS

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